कुलपति ने कहा कि राजनीतिक सत्ता बरकरार रखने के लिए आपको कथात्मक शक्ति की आवश्यकता है। और जब तक हम इसे हासिल नहीं कर लेते, हम एक दिशाहीन जहाज की तरह रहेंगे। उन्होंने कहा कि मैं बचपन में बाल सेविका थी, आरएसएस के संगठन से ही मुझमें ऐसे संस्कार फलित हुए।
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